Moong ki kheti : मूंग की खेती कर कमा सकते है तगड़ा मुनाफा, अपनाना होगा यह तरीका

Moong ki kheti : कृषि विज्ञान केंद्र, सिवान के डॉ मधुसूदन कुण्डू ने बताया है की, भारत के अलग-अलग राज्यों में मूंग की खेती की जाती है। अभी गेहूं काटने के बाद धान की खेती में 2 से 3 महीने का वक्त लगने वाला है। इसी बीच किसान भाई मूंग की खेती करके अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। मूंग की खेती एक थोड़े समय में की जाने वाली बहुत ही लोकप्रिय दलहनी खेती है। भारत में शाकाहारी भोजन वाले लोगों लोग के लिए यह प्रोटीन का सबसे अच्छा माध्यम है। मूंग भारत में पैदा हुआ लेग्युमिनेसी पौधा है। मूंग के दानों में लगभग 24 से 25 प्रतिशत प्रोटीन, 60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट और 1.3 प्रतिशत वसा होता है। ग्रीष्मकालीन सरसों, चना, मटर, गेहूँ, जौ, अलसी, आलू और अन्य फसलों की कटाई के बाद खाली खेतों में मूंग की खेती की जा सकती है। धान गेंहू फसल चक्र वाले खेतों में जायद मूंग की खेती मृदा उर्वरता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। ग्रीष्मकाल में मूंग उगाकर आय बढ़ सकती है। आज डॉ साहब हमें मूंग की खेती के बारे जानकारी देने वाले हैं। चलिए आगे पढ़ते हैं।Mung ki Kheti

Moong ki kheti

वायु

Moong ki kheti : मूंग हर मौसम में बोया जा सकता है। दक्षिण भारत में रबी के मौसम में मूंग की खेती की जाती है, जबकि उत्तर भारत में खरीफ ऋतु (वर्षा) और ग्रीष्म ऋतु में मूंग की खेती की जाती है। इसकी खेती गर्म जलवायु में होती है। जहां वर्ष में 60 से 70 सेंटीमीटर वर्षा होती है वर्षा अधिक होने से फली और दाने सड़ जाते हैं। अंकुरण के लिए 25 सेंटीग्रेड और बढ़वार के लिए 20 से 40 सेंटीग्रेड उपयुक्त हैं।Mung ki Kheti

मिट्टी

इसकी खेती के लिए अच्छी जल धारण क्षमता वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है। मूंग की खेती उचित जल निकास वाली मटियार और बलुई दोमट मिट्टियों में भी की जा सकती है। मृत शरीर का पीएच 7-7.5 होना चाहिए।

मिट्टी चिकित्सा

मिट्टी जनित बीमारियों, कीटों और दीमक को नियंत्रित करने के लिए, बुवाई पूर्व क्यूनालफास में 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मिलाया जाए।Moong ki kheti

उन्नत प्रजातियां

IPM-2, MH-2-15, HUM-1, HUM-12, पंत मूंग 2, 4, 5, सम्राट, नरेंद्र मूंग-1, सुनैना, मालवीय जागृति, मालवीय प्रकाश, मूंग जनप्रिया, पूसा विशाल।

बीज की दर

खरीफ मौसम में प्रति हेक्टेयर 12-15 किलोग्राम बीज देना चाहिए, और बुवाई कतारों को 30 से 40 सेंटीमीटर की दूरी पर रखना चाहिए. रबी और गरमा के मौसम में 20 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर देना चाहिए, और बुवाई कतारों को 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी पर रखना चाहिए।Moong ki kheti

बीज का उपचार

बुवाई से पहले 3 ग्राम थाईरम, 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम या 5 से 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा से उपचार करें। कीटों को बचाने के लिए बीज को 5 मिली इमिडाक्लोप्रिड प्रति kg बीज की दर से बीजोपचार करें। इसके बाद बीजों को राइज़ोबियम से उपचारित करें, साथ ही फास्फेट की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए पी एस बी कल्चर का भी उपयोग करें, जिससे उत्पादकता बढ़ती है।Moong ki kheti

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बुवाई करने का समय

15 मार्च से 15 अप्रैल तक मूंग की बुवाई करने का सबसे अच्छा समय है। बुवाई समय पर करें; देर से बुवाई करने पर फूल आते समय तापमान बढ़ जाता है, जिससे फलियाँ कम हो जाती हैं, इससे उपज में बहुत कमी हो सकती है।

बुवाई की प्रक्रिया

पंक्तियों में मूंग की बुवाई जीरो टीलेज मशीन या सीडड्रिल से करनी चाहिए। तार से कतार की 30 सेन्टीमीटर और पौधे से 10 सेन्टीमीटर की दूरी रखें। बीज को 4–5 सेन्टीमीटर की गहराई पर बोना चाहिए।

खनिज और उर्वरक

20 किलोग्राम पोटाश, 45 किलोग्राम फास्फोरस और 20 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर देना चाहिए। बुवाई के समय ही डी.ए.पी. (100 किया/हे.) से उर्वरक वाले बाक्स में नाइट्रोजन और फास्फोरस भरें। पहले सिचाई से पहले, समान पोटाश म्यूरेट डाल देना चाहिए। यदि मूंग की खेती आलू और चने की फसल के बाद की जाए तो उर्वरक की आवश्यकता कम होगी।Moong ki kheti

सिंचाई

मूंग की खेती जायद ऋतु में करने के लिए अच्छी नमी में बुवाई करें और गहरा पलेवा करें। पहली सिचाई दस से पंद्रह दिनों में करें, फिर दस से पंद्रह दिनों के अंतराल पर सिचाई करें। शाखा निकलते समय, फूल आते समय और फूल आने पर सिचाई करना बहुत महत्वपूर्ण है।Moong ki kheti

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खरपतवार की रोकथाम

मूंग की बुवाई के बाद पेंडिमेयालीन को 600 लीटर पानी में घोलकर अंकुरण से पहले छिड़कें। 2025 दिन बाद, क्वीनालफास इथाईल (50 ग्राम प्रति हेक्टेयर) को 600 लीटर पानी में घोल करके छिड़काव करके खरपतवारों को कम कर सकते हैं।

पौधरक्षा

ग्रीष्मकाल में कड़ी धूप और अधिक तापमान के कारण कीटों और रोगों का प्रकोप कम होता है। पीला मोजैक मूंग में यह रोग अक्सर सफेद मक्खी से फैलता है।Moong ki kheti

नियंत्रित

रोगग्रस्त पौधों को उखाड़ कर मिट्टी में दबा दें या जलाकर नष्ट कर दें। परीक्षण के बाद 250 मिली इमिडाक्लोप्रिड को 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।Moong ki kheti

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